26.9.18

मिलिए बल्‍ली सिंह से जिन्‍हें पार्टी करने के लिए मिलते हैं अरबों रुपये

बड़े से बड़े सेलिब्रिटी के साथ रहना, महंगी से महंगी शैम्‍पेन पीना और प्राइवेट प्‍लेन से दुनिया जहान घूमना हम में से ज्‍यादातर लोगों के लिए किसी सपने से कम नहीं, लेकिन एक शख्‍स के लिए यह रोज की बात है. इस शख्‍स के लिए दिन-रात पार्टी करना ही कमाई का जरिया है. यानी कि जितनी पार्टी उतने पैसे |

 जी हां, यहां बात हो रही है इंग्‍लैंड की लिसिस्‍टर सीटी के बल्‍ली सिंह की, जो अरबों की वीआईपी ईवेंट कंपनी चलाते हैं. उन्‍हें बेहद अमीरों और मशहूर लोगों के लिए पार्टी ऑर्गेनाइज करने के बदले में करोड़ों रुपये मिलते हैं. 42 साल के बल्‍ली को 'द मोस्‍ट इंटरेस्‍टिंग मैन इन इंडिया' (भारत का सबसे दिलचस्‍प आदमी) की उपाध‍ि भी मिली हुई है. दुनिया का बड़े से बड़ा शख्‍स और कंपनियां उनकी क्‍लाइंट हैं. यही नहीं बल्‍ली अपनी घड़‍ियों को शैम्‍पेन से धोने के लिए भाी मशहूर हैं. शैम्‍पेन की कीमत भी कोई मामूली नहीं बल्‍कि 17 लाख रुपये है. आपको यह जानकर हैरानी होगी कि दिन-रात पार्टी ऑर्गेनाइज करने का काम करने के बावजूद बल्‍ली शराब की घूंट तक नहीं पीते हैं.
बल्‍ली के पास पैसों की कोई कमी नहीं. तभी तो उन्‍होंने एक हफ्ते में दो फरारी खरीद डालीं वो भी अपना बैंक बैलेंस चेक किए बिना. हालांकि उनके लिए इस मकाम को हासिल करना आसान नहीं था. यही वजह है कि वो आज भी अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं. मल्‍टी-मिलेनियर बनने से पहले बल्‍ली हालांकि लिसिस्‍टर में अपने पिता की टेक्‍सटाइल फैक्‍ट्री में काम करते थे, लेकिन वो खुद अपनी पहचान बनाना चाहते थे. 16 साल की छोटी उम्र में जहां बच्‍चे मस्‍ती और खेल-कूद करना पसंद करते हैं वहीं उस उम्र में बल्‍ली खुद का नाइट क्‍लब चलाते थे |.

मेहनत के दम पर ड्राइवर की बेटी बनी मिस इंडिया,पेश की मिसाल

 नैनीताल की रहने वाली खुशबू रावत ने अपनी मेहनत से देश भर के लिए एक नई मिसाल कायम की है. खुशबू को इस साल केंद्रीय खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा आयोजित कराई गई प्रतियोगिता में मिस इंडिया खादी के खिताब से नवाजा गया है. खास बात यह है कि उत्तराखंड की रहने वाली खुशबू ने यह खिताब तमाम मुश्किलों को पीछे छोड़ते हुए जीता है.
खुशबू के पिता भीमताल में ड्राइवर हैं लेकिन उन्होंने कभी भी अपने बच्चों के सपने को पूरा करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी. यही वजह है कि इस खिताब को जीतने के बाद खुशबू इस खिताब को जीतने का श्रेय अपने पिता को देती हैं. ग्रामोद्योग बोर्ड ने इस प्रतियोगिता को राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित कराया था.
इसके लिए अलग-अलग राज्यों से इस प्रतियोगिता के लिए ऑडिशन कराया गया था. इस दौरान हर राज्य के विश्वविद्यालय और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में इसके ऑडिशन कराए गए. देश भर के दो सौ से विश्वविद्यालय के करीब 50 हजार छात्रों ने इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था.
इसका ऑडिशन दिल्ली में कराया गया था. इसमें खुशबू रावत पहले नंबर पर रही. खुशबू चंडीगढ़ में रहकर पढ़ाई कर रही हैं |


किसान की बेटी ने रचा इतिहास UPSC 2017

 मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर की रहने वाली तपस्या परिहार की Civil services exam 2017 में 23वीं ऑल इंडिया रैंक आई.UPSC Result 2017 का फाइनल रिजल्ट जारी हो चुका है.की खबर के मुताबिक, तपस्या परिहार के पिता किसान हैं और काफी संघर्ष करके उन्होंने बेटी की पढ़ाई कराई है. तपस्या ने नरसिंहगढ़ के केंद्रीय विध्यालय से अपनी स्कूलिंग की है. जिसके बाद उन्होंने पुणे के इंडिया लॉ सोसाइटीज लॉ कॉलेज से लॉ की पढ़ाई की. जिसके बाद वो Union Public Services Commission की तैयारी के लिए दिल्ली आ गईं.
उन्होंने अपने सफलता का क्रेडिट पिता विश्वास और मां को दिया है. उन्होंने  बताया- मेरे परिवार ने मुझे काफी सपोर्ट किया है. उन्होंने मुझे पढ़ाई के लिए कभी मना नहीं किया. उन्हीं के कारण में सफल हो पाई. सक्सेस का राज खोलते हुए तपस्या ने बताया- ''मैं कोई एक्सट्रा ऑर्डिनरी स्टूडेंट नहीं हूं. लेकिन मैं हार्ड वर्क पर विश्वास रखती हूं. मैं जिस सब्जेक्ट को पढ़ती हूं, उसपर पूरा फोकस करती हूं. यही मेरे सफलता का राज है.''

दुनिया के सबसे छोटे बस ड्राइवर से, गिनीज बुक में नाम शामिल

55 साल के फ्रैंक फेएक हैचम का नाम हाल ही में 'गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' में शामिल किया गया है. जिसमें उन्हें दुनिया के सबसे छोटे बस ड्राइवर का दर्जा दिया गया है. उनका कद 132. 2 सेंटीमीटर यानी 4 फीट 5.6 इंच है.
बता दें, फ्रैंक चिचेस्टर, वेस्ट ससेक्स, यूनाइटेड किंगडम में बस ड्राइवर के रूप में काम कर रहे हैं. फ्रैंक बचपन से ही अचोंड्रोप्लासिया से पीड़ित है. जिसकी वजह से उनके शरीर का विकास पूरी तरह नहीं हो पाया.
उन्होंने ने बताया उन्होंने अपनी ट्रेनिंग पूरी कर ली. भले ही कद कम हो लेकिन वह हर तरह की बस चला सकते हैं. मूल रूप से फ्रैंक इराक से है. वह 20 साल पहले यूनाइटेड किंगडम चले गए थे. पिछले डेढ़ साल से वह प्रोफेशनल बस ड्राइवर के रूप में काम कर रहे हैं.
जैसे ही ये खिताब उनके नाम हुआ लोगों ने उन्हें बधाई देना शुरू कर दिया. फ्रैंक उन लोगों के मिसाल हैं जिन्हें लगता है जीवन में सब कुछ परफेक्ट हो तभी आप लोगों की बीच छा सकते हैं, लेकिन वह लोग ये बात ये भूल जाते हैं कि कुछ चीजें परफेक्ट होती नहीं है उन्हें परफेक्ट बनाना पड़ता है |

93 की उम्र में शुरू हुआ करियर, 102 की मन कौर ने रेस में जीता गोल्ड

जिस उम्र में लोग बेड पर आराम करते हैं या अपने काम भी दूसरों से करवाते हैं, उस उम्र में मन कौर जवान लोगों की तरह ना सिर्फ काम करती हैं, बल्कि अपनी फिटनेस की वजह से मेडल भी जीत रही हैं. खास बात ये है कि मन कौर की उम्र 102 साल है और उन्होंने हाल ही में एक रेस जीत कर साबित कर दिया है कि उम्र सिर्फ एक संख्या मात्र है |
मन कौर ने 93 साल की उम्र में अपने करियर की शुरुआत की और हाल ही में उन्होंने वर्ल्ड मास्टर एथेलेटिक्स में 200 मीटर रेस में गोल्ड मेडल हासिल किया है. बता दें कि यह रेस 100 से 104 की उम्र वालों के लिए आयोजित की थी. सोशल मीडिया पर भी मनकौर की काफी तारीफ हो रही है.
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102 साल की मन कौर उस उम्र में एकदम फिट हैं, जिस उम्र में दूसरे बुजुर्ग छड़ी के सहारे चलते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने यह रेस 3 मिनट 14 सेकेंड में पूरी कर ली और गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया. बताया जा रहा है कि इस रेस का आयोजन स्पेन में किया गया था, जहां मन कौर ने यह कारनामा कर दिखाया है |
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इससे पहले भी मन कौर कई रेस में हिस्सा ले चुकी हैं. उन्होंने 200 मीटर की तरह 100 मीटर की रेस में भी हिस्सा लिया था और गोल्ड मेडल हासिल किया था. मन कौर को उनके 78 साल के बेटे से इस रेस की प्रेरणा मिली और उनके बेटे गुरुदेव ने 2011 में अपनी मां को खेल में वापसी करवाई थी.

कभी वेटर था ये शख्स बना IAS ऑफिसर 7वें प्रयास में पास की UPSC परीक्षा

जानिए के जयागणेश की कहानी
जयागणेश के पिता गरीब थे. लेदर फैक्टरी में सुपरवाइजर का काम कर हर महीने सिर्फ 4,500 तक ही कमा पाते थे. परिवार में अक्सर पैसों में कमी रहती थी. चार भाई-बहनों में जयागणेश सबसे बड़े थे ऐसे में बसे बड़े होने के कारण घर की खर्च की जिम्मेदारी भी उन पर ही थी. बता दें, वह शुरू से ही पढ़ाई में अच्छे थे. 12वीं में उनके 91 प्रतिशत अंक आए थे. फिर उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू कर दी.
इंजीनियरिंग की डिग्री मिलने के बाद इन्हें 25,00 प्रति महीना पर एक नौकरी भी मिल गई, लेकिन जल्द ही उन्हें यह एहसास होने लगा कि शिक्षा उनके गांव के बच्चों के लिए भी बेहद जरूरी है. क्योंकि उन्हें गांव के पिछड़ेपन और बच्चों के स्कूल न जाने पर दुख होता था.
उन्होंने बताया- उनके गांव के अधिकतर बच्चे 10वीं तक ही पढ़ाई कर पाते थे और कई बच्चों को तो स्कूल का मुंह ही देखना नसीब नहीं होता था. जयगणेश बताते हैं, कि उनके गांव के दोस्त ऑटो चलाते हैं या शहरों में जाकर किसी फैक्ट्री में मजदूरी करते हैं. अपने दोस्तों में वह इकलौते थे जो यहां तक पहुंचे थे.
अगर हुनर और काबिलियत आपके पास है तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको कामयाब होने से रोक नहीं सकती. आज हम एक ऐसे शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने नामुमकीन काम को मुमकीन कर दिखाया. तमिलनाडु में एक परिवार में पैदा हुए के. जयागणेश ने 7वें प्रयास में UPSC की परीक्षा पास की और IAS ऑफिसर बनें. आइए जानते हैं उनके बारे में ...
के. जयागणेश एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखते थे, ऐसे में वह अपने परिवार की गरीबी मिटाना चाहते थे और IAS ऑफिसर बनने के लिए यूपीएससी की पढ़ाई करने लगे. लगातार मेहनत करने से सफलता मिलती है. ये जयागणेश ने ही साबित कर दिखाया है. 1, 2 नहीं बल्कि 6 बार यूपीएससी की परीक्षा में फेल होने के बाद उन्हें 7वीं बार सफलता हासिल हुई और 156वीं रैंक हासिल की.
गांव को बदलने का आया ख्याल
इसी दौरान उन्हें पता चला कि वह बदलाव ला सकते हैं अगर वो कलेक्टर बन जाए. इसलिए उन्होंने अपना जॉब छोड़ना बेहतर समझा और सिविल सर्विस की तैयारी करने शुरू कर दी. जल्द ही किसी से भी मार्गदर्शन नहीं मिलने के कारण रास्ता कठिन दिखने लगा. अपने पहले दो प्रयास में तो ये प्रारंभिक परीक्षा भी नहीं पास कर पाए. बाद में उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग के जगह सोशियोलॉजी को चुना. इसका भी फायदा नहीं हुआ और यह तीसरी बार में भी फेल हो गए.
जिसके बाद उन्हें चेन्नई में सरकारी कोचिंग के बारे में मालूम चला जहां आईएएस की कोचिंग की तैयारी करवाई जाती है. तैयारी करने के लिए ये चेन्नई चले गए. वहां एक सत्यम सिनेमा हॉल के कैंटीन में बिलिंग ऑपरेटर के तौर पर काम मिल गया. जिसके बाद उन्हें इंटरवल के वक्त उन्हें वेटर का काम करना पड़ता था. उन्होंने बताया मुझे मेरा बस एक ही मकसद था. कैसे भी करके IAS ऑफिसर बनना चाहता हूं.
जयागणेश ने काफी मेहनत से पढ़ाई की, फिर भी पांचवी बार में सफलता हासिल नहीं कर पाए. आगे पढ़ाई करने के लिए पैसे की कमी बहुत ज्यादा आड़े आ रही थी. अब उन्होंने
छठीं बार असफल होने के बाद भी उन्होंने उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा. जिसके बाद उन्होंने 7वीं बार यूपीएससी की परीक्षा दी. जब वे 7वीं बार परीक्षा में बैठे तो प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू भी पास कर गए. उन्हें 7वीं बार में 156वां रैंक मिल गई. जिसके बाद जयागणेश को लगा आखिकार एक लंबे युद्ध को जीत लिया है. आपको बता दें, जयागणेश के पास इंटेलिजेंस ब्यूरो में ऑफिसर की नौकरी का ऑफर था लेकिन उनकी जिद IAS ऑफिसर बनने की थी और वह बन भी गए |

अब फोर्ब्स की लिस्ट में है नाम ,IIT की तैयारी छोड़ किया ये काम,

फोर्ब्स इंडिया ने टायकूंस ऑफ टुमारो की लिस्ट जारी कर दी है. इस लिस्ट में ऑयो रूम्स के फाउंडर के फाउंडर रितेश अग्रवाल का नाम भी शामिल है. उन्होंने महज 24 साल की उम्र में ही करोड़ों की कंपनी खड़ी कर दी. ऐसे में जानते हैं रितेश ने कैसे इस कंपनी को शुरू किया और आज वे किस मुकाम पर हैं--
दरअसल रितेश के माता-पिता दरअसल चाहते थे कि वो आईआईटी में दाखिला ले और इंजीनियर बनें. रितेश भी कोटा, राजस्‍थान में रह कर आईआईटी एंट्रेस एग्‍जाम की ही तैयारियों में जुटे थे. लेकिन बाद में उन्‍होंने दिल्‍ली के इंडियन स्‍कूल ऑफ बिजनेस एंड फाइनेंस में एडमिशन लिया था लेकिन अपनी कंपनी शुरू करने के लिए कोर्स को बीच में ही छोड़ दिय
हालांकि अपने आइडियाज और वीजन को पूरा होता देखने के लिए रितेश इंतजार नहीं करना चाहते थे. उन्‍होंने IIT की तैयारी छोड़कर अपने बिजनेस की तैयारी शुरू कर दी. 19 साल के रितेश अग्रवाल महीनों घूमते और बजट होटल में रुकते, ताकि वहां की तमाम चीजों के बारे में जान सकें. अपने अनुभव के बल पर रितेश ने अपने पहले स्‍टार्ट-अप यात्रा की शुरुआत की.
रितेश ने एक वेबसाइट तैयार की, जहां वो सस्‍ते और किफायती होटल्‍स के बारे में जानकारी देते थे. इस वेबसाइट का नाम रखा 'ओरावल'. कुछ दिनों तक वेबसाइट चलाने के बाद रितेश को लगा कि लोग शायद नाम के चलते वेबसाइट को समझ नहीं पा रहे हैं. इसलिए उन्‍होंने साल 2013 में उसका नाम बदल कर OYO Rooms कर दिया.

केन्‍द्र और राज्‍य सरकार की दलीलों को स्‍वीकारा, कहा सरकारी नौकरियों के प्रमोशन में SC/ST को आरक्षण SC का बड़ा फैसला

सरकारी नौकरियों में प्रमोशन के मामले में SC/ST आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने बुधवार को अपना अहम फैसला सुनाया है. सरकारी नौकरियों के लिए प्रमोशन में आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि सरकारी नौकरियों के प्रमोशन में SC/ST को आरक्षण मिलेगा. सरकारी नौकरी में प्रमोशन में SC/ST आरक्षण पर फैसले के लिए मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस रोहिंटन नरीमन, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस इंदु मल्होत्रा ​​की संविधान पीठ ने कहा कि नागराज जजमेंट को सात जजों को रैफर करने की जरूरत नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लेकिन एक राहत के तौर पर राज्य को वर्ग के पिछड़ेपन और सार्वजनिक रोजगार में उस वर्ग के प्रतिनिधित्व की अपर्याप्तता दिखाने वाला मात्रात्मक डेटा एकत्र करना जरूरी नहीं है.
SC-ST एक्ट पर भाजपा के मंत्री ने कहा- सुप्रीम कोर्ट का फैसला सही, केंद्र फिर करे विचार
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों की दलील स्वीकारीं और कहा कि अब सरकार सरकारी नौकरी में प्रमोशन में SC/ST आरक्षण दे सकती है. बता दें कि संविधान पीठ को यह तय करना था कि सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों के संविधान पीठ के 12 साल पुराने नागराज फैसले पर फिर से विचार करने की जरूरत है या नहीं.
30 अगस्त को सरकारी नौकरियों में प्रमोशन में आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट की सविधान पीठ ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा था. मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस रोहिंटन नरीमन, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस इंदु मल्होत्रा ​​की संविधान पीठ के समक्ष इस तरह के कोटे के खिलाफ 2006 के नागराज फैसले पर पुनर्विचार की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई पूरी हो गई थी.
आरक्षण का कानून बिना बहस के ही दोनों सदनों में पारित करना खतरनाक
केंद्र और राज्य सरकारों ने जहां सरकारी नौकरी में प्रमोशन में आरक्षण की वकालत की है तो वहीं याचिकाकर्ताओं ने इसका विरोध किया है. केंद्र ने कहा है कि संविधान में SC/ST को पिछड़ा ही माना गया है. इसलिए वर्ग के पिछड़ेपन और सार्वजनिक रोजगार में उस वर्ग के प्रतिनिधित्व की अपर्याप्तता दिखाने वाला मात्रात्मक डेटा एकत्र करने की जरूरत नहीं है.
SC में केन्‍द्र सरकार ने कहा, क्रीमी लेयर को प्रमोशन के आरक्षण के लाभ से नहीं किया जा सकता वंचित
टिप्पणियां गौरतलब है कि अक्टूबर 2006 में नागराज बनाम भारत संघ के मामले में पांच जजों की संविधान बेंच ने इस मुद्दे पर निष्कर्ष निकाला कि राज्य नौकरी में पदोन्नति के मामले में अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण करने के लिए बाध्य नहीं है. हालांकि अगर वे अपने विवेकाधिकार का प्रयोग करना चाहते हैं और इस तरह का प्रावधान करना चाहते हैं तो राज्य को वर्ग के पिछड़ेपन और सार्वजनिक रोजगार में उस वर्ग के प्रतिनिधित्व की अपर्याप्तता दिखाने वाला मात्रात्मक डेटा एकत्र करना होगा |

डॉक्टर के बड़े-बड़े पदों पर 65 साल तक की उम्र के लिए हो रही हैं भर्तियां,

(CMOH)चीफ मेडिकल ऑफिसर ऑफ हेल्थ , रामपुरहाट में मेडिकल ऑफिसर और अन्य पदों पर भर्तिया हो रही है। आवेदन करने की आंतिम तिथि 08 अक्टूबर 2018 निर्धारित की गई है। संस्था ने पदों के अनुसार अलग-असग योग्यताएं निर्धरित की हैं। जो मेडिकल ऑफिसर के पदों पर आवेदन करेंगे उनके पास एमसीबी द्वारा मान्यता प्राप्त एम.बी.बी.एस डिग्री का होना जरूरी है। रिटायर्ड स्टाफ नर्स के पदों के लिए आवेदन करने वाले भारतीय नर्सिंग काउंसिल द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थान से जीएनएम उत्तीर्ण होने अनिवार्य है। बीकॉम वाले छात्र ब्लॉक एकाउंट्स मैनेजर (बीएएम) के लिए आवेदन कर सकते हैं।
पदों का विवरण
पद का नाम कुल पद
मेडिकल ऑफिसर 2 पद
रिटायर्ड स्टाफ नर्स 1 पद
ब्लॉक एकाउंट्स मैनेजर 1 पद
आयु सीमा
मेडिकल ऑफिसर (AH)-     65 वर्ष अनिवार्य
मेडिकल ऑफिसर (NUHM)- 63 वर्ष अनिवार्य
रिटायर्ड स्टाफ नर्स-              64 वर्ष अनिवार्य
ब्लॉक एकाउंट्स मैनेजर (बीएएम)- 40 वर्ष अनिवार्य

UKPSC Uttarakhand Lecturer 2018 Online Form

UKPSC Uttarakhand Public Service Commission,

Lecturer Recruitment 2018
Important Dates
Application Start 04/09/2018
Last Date 10/10/2018
Fee Last Date 10/10/2018
Admit Card Notified Soon
Exam Date Notified Soon
Application Fee
General Candidates 135/-
OBC,SC, ST Candidates 95/-
PH Candidates 35/-
Payment Mode
Pay the Exam Fee Through the Debit Card, Credit Card,Net Banking Fee Mode.
Age Limit as On 31/08/2018
Min. Age 21 Years
Max. Age 42 Years
Read the Notification for Age Relaxation.
Eligibility
Bachelor Degree in Related Subject with LT Diploma from any Recognized University
B.Ed Degree from Recognized University
Vacancy Details
Total Vacancy 917 Post
Subjects  Total Post

Economics     56
History          48
Sociology      07
Geography    98
Hindi           138
English        113
Sanskrit        63
Physics         90
Chemistry     61
Mathematics  73
Biology          83
Agriculture    01
Psychology    01
Civics            83
Commerce    02

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